एक बन्दर और गौरैया चिड़िया

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एक बहुत बड़ी इमारत के पीछे बेहद पुराना पेड़ था । उस पेड़ पर एक बन्दर और गौरैया चिड़िया का बसेरा था । एक दिन इस इमारत में आग लग गई । सारे लोग आग बुझाने में जुट गए । कोई फायर ब्रिगेड को फोन कर रहा था, तो कोई आग पर पानी फेंक कर आग बुझाने कि कोशिश कर रहा था ।

बहुत दु:खी होकर चिड़िया ने बन्दर से कहा- बन्दर भाई हम भी कई सालों से इस इमारत का हिस्सा है और हमें भी आग बुझाने के लिए कुछ करना चाहिए । यह बात सुनते ही बन्दर जोर से हँसा और बोला – तू बित्ते भर की गौरैया क्या कर पाएगी , क्या तुम इस इमारत की आग बुझा लेगी ।

गौरैया चुप हो गई , फिर थोड़ी देर बाद गौरैया ने बन्दर से फिर कहा- लेकिन बन्दर ने फिर से मजाक उड़ा दिए । अब गौरैया से रहा नहीं गया , पेंड़ से उड़ कर वह पास ही पानी के एक छोटे से गड्ढे में गई और पानी को अपनी चोंच में लाकर आग पर डाला । बहुत देर तक वह उस गड्ढे से पानी लाकर डालती रही । बन्दर यह देखकर लगातार हँस रहा था, काफी देर बाद बहुत सारे लोगों के प्रयासों से आग बुझ गई ।


गौरैया के पेड़ पर लौटते ही बन्दर ने कहा – तुम्हें क्या लगता है कि तुमने अपनी छोटी सी चोंच से पानी डालकर इस आग को बुझाया है । गौरैया ने तिरस्कार से बन्दर को देखा और जवाब दिया – सुनो बन्दर भाई इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है , कि मेरी चोंच का साइज क्या है। इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि आग को बुझाने में मेरा योगदान कितना था । लेकिन तुम यह बात हमेशा याद रखना कि जिस दिन इमारत में आग लगने और बुझाने का इतिहास लिखा जाएगा, उस दिन मेरा नाम आग बुझाने वालों में आएगा और तुम्हारा नाम किनारे बैठ कर हंसने वालों में आएगा ।

दोस्तों, यह सच है कि हम सब की क्षमताएँ अलग – अलग है, परिस्थितियां भी अलग – अलग है, योग्यताएँ भी अलग – अलग है या यूँ कहूं कि हम सबकी भी चोंच का साइज अलग – अलग है । लेकिन इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारी चोंच का साइज क्या है, फर्क इस बात से पड़ता है कि हमने उतना प्रयास किया या नहीं जितना हम कर सकते थे । क्या हमने अपनी पूरी ताकत झोंकी या नहीं , जितना हम झोंक सकते थे । क्या हम अपनी पूरी क्षमता के साथ मुश्किल का सामना कर रहे हैं या नहीं ।

यदि हम भी इसी गौरैया की तरह अपने कार्य में जुट सकते हैं ? यदि हम तमाम परिस्थितियों के बीच अपने काम को बड़ी मेहनत और लगन के साथ पूरा कर सकते हैं, तो हमारी जीत भी एक दिन निश्चित है । हमें अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी, जीवन में किसी भी प्रकार की बहानेबाजी या दोषारोपण के लिए जगह नहीं होनी चाहिए । हर व्यक्ति दूसरे को बदलना चाहता है यही हमारी समस्या का मूल आधार है , दूसरों को बदलने के बजाए हम सभी अपनी जिम्मेदारी ले ले तो क्या नहीं हो सकता , अपनी चोंच की साइज की चिंता छोड़िए , अपनी पूरी ताकत से सपनों को पाने की दिशा में जुट जाइये ।..
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